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आज कर स्क े मरए हभें ू रों भें बी ऩढ़ामा जाता है की हभें चिकन . भटन आदद से प्रोटीन मभरता है.

ऩय इसक ककसी की ह्त्मा कयने की ज़रुयत नहीीं. ईश्वय ने प्रोटीन क े मरए दारें फनाई है .हभें सबी प्रकाय की दारों का इस्तेभार फदर फदर कय कयते यहना िादहए. आइमे जानते है इनक े फाये भें --दारें -- उड़द की दार से ऩाऩड़, फड़ा, इडरी, डोसा, नभकीन तथा मभष्ठान फनते हैं। मह ऩिने भें बायी तथा चिकनी होती है । आमुवेद भें इसकी तासीय गभम होती है । आमुवेद क े अनुसाय मह वामु को शाींत कयती है तथा कप एवीं पऩ्त दोषों को फढ़ाती है । इसक े ननममभत सेवन कयने से मह नऩुींसकता को दय ू कयती है तथा शक्तत को फढ़ाती है । उड़द की दार भें घी मभराकय खाने से भाताओीं क े दध ू की भात्रा फढ़ जाती है । - भूग की दार को बूनकय इसक े आटे की योटी फनाकय सेवन ककमा जाता है । इसको दारभोठ की तयह नभकीन फनाकय बी खामा जाता है । भग े ऩाऩड़, रडडू इ्मादद बी फनामे जाते हैं। भूींग की दार ऩिने भें हल्की ूीं की दार क होती है । मह रूखी, कसैरी औैय स्वाद भें भीठी होती है । आमुवेद क े अनुसाय इसकी तासीय ठण्डी है औय मह कप एवीं पऩ्त दोषों को शाींत कयती है । मह आींखों क े मरए ऩयभ दहतकायी है । इसका ननममभत सेव न कयने से साभान्म कभजोयी दय ू होती हैं ितकय आने की मशकामत दय ू होती है । भींग ू की दार पवपवध वामु योगों, खाींसी, नकसीय इ्मादद योगों क े उऩिाय भें बी उऩमोगी है । मह पवटामभन ए, फी, सी औय क े , का अच्छा स्रोत है । इससे फेयी-फेयी नाभक योग बी दय े साथ फुखाय की बी उ्तभ दवा है । फुखाय एवीं ऩेट क े योग भें भूींग ू होता है । भूींग की दार दस्त को योकने क से फना हुआ सूऩ सेवन कयना फेहद राब दे ता है । ियक सींदहता क े अनुसाय भूींग की दार औैय आींवरे क े नन्म सेवन से सप े द दाग अथामत ल्मूकोडभाम, कप क े कायण ऩैदा होने वारी ऩेशाफ कयने भें कदठनाइम औय फीस प्रकाय क े प्रभेह योग शाींत होते हैं। प्रभेह का ही एक रूऩ भधभ ु ेह अथामत डामफीदटज बी है । - िने की दार ऩिने भें हल्की , स्वाद भें कसैरी औय भीठी है । इसकी तासीय ठण्डी होती है । इसक े अचधक सेवन से हभाये शयीय भें वामु नाभक दोष फढ़ता है । मह कप, पऩ्त एवीं यतत सम्फधी पवकायों की उ्तभ औषचध है । इसक े सेवन से शयीय भें रूखाऩन आता है । आमव े अनस ु ेद क ु ाय उच्ि यततिाऩ से ऩीडडत को फयाफय भात्रा भें गेहूीं औय कारा िना मभराकय िोकय सदहत पऩसे हुए आटे की योटी का नन्म सेवन कयना िादहए। कारे िने रृदम योचगमों क े मरए ननताींत राबदामक होते हैं। इनक े ननममभत सेवन से कारेस्रार की भात्रा का सहज ही ननमभन होने रगता है । िने से फनामा हुआ स्तू अम्र पऩ्त अथामत ऐमसडडटी तथा ऩैपऩटक अल्सय की अवस्था भें उ्तभ आहाय है । - आमुवेद क े अनुसाय भसूय की दार बी ऩिने भें हल्की होती है । मह रूखी, ठण्डी औय भीठी होती है । मह कप एवीं पऩ्त दोषों को शाींत कयती है । मह शयीय क े ककसी बी बाग भें होने वारे यतत स्राव को योकती है । मह पवटामभन ए , फी, सी तथा क े , का उ्तभ स्रोत है । भसूय की दार भें अनेक सौंदममवधमक गुण बी ऩामे जाते हैं। क्जन मुवनतमों क े िेहये ऩय झाइमाीं होती हीं , उन्हें भसूय की दार को फकयी क े दध ू भें ऩीसकय िेहये ऩय रेऩ कयने से फहुत राब मभरता है । - अयहय की दार हल्की औय रूखी होती है । इसका स्वाद कसैरा औय भीठा होता है । इसकी तासीय ठण्डी होती है ।

मह वामु को फढ़ाती है तथा कप औय पऩ्त को शाींत कयती है । अयहय की दार से भोटाऩा बी दय ू होता है । - भोठ क े दानों का उफारकय, बूनकय मा दार क े रूऩ भें उऩमोग ककमा जाता है । इसक े आटे की योदटमाीं बी फनती हैं। आमुवेद क े अनुसाय इसका यस भधुय होता है । मह दाींतों को फाींधती है । मह रूखी औय इसकी तासीय ठण्डी होती है । नकसीय, खन े अरावा होने वारे यतत स्राव इ्मादद को मह शाींत कयती है । फख ू ी दस्त, भाहवायी क ु ाय भें बी मह राबप्रद है । -क े अनुसाय इसकी तासीय गभम है । स्वाद भें मह ु रथी- क ु रथी को सींस्कृत भें क ु रथ कहा जाता है । आमुवेद क कसैरी होती है । मह ऩिने भें हल्की होती है । मह कप सम्फधी पवकायों की अिूक दवा है । वामु दोष जैसे शयीय भें कहीीं बी ददम होना, जोड़ों भें ददम को बी शाींत कयती है । शीतकार भें वामु योगों से ऩीडडतों क े मरए इसका ननममभत सेवन पवशेष राबप्रद होता है । तासीय भें गभम होने क े कायण मह दस्त योकती है । खाींसी , दभा, दहिकी इ्मादद श्वसन तींत्र क े पवपवध योगों को शाींत कयती है । फवासीय क े योचगमों को बी राब दे ती है । मह भत्र ू ाशम भें होने वारी ऩथयी की बी अिूक औषचध है । - ऩथयी होने ऩय क े िुणम को भूरी क े ऩ्ते क े यस क े साथ सेवन कयामा जाता है । इसक े सेवन से ु रथी की दार क ऩेशाफ की रूकावट दय े फाद गबामशम की शप े मरए इस दार का ू होती है औैय ऩेशाफ खर ु कय आता है । प्रसव क ुि क सेवन फहुत ही राबप्रद है । कष्ट क े साथ होने वारी भहावायी ऩय बी मह राबप्रद है । दहन्दी भें इसे रोबफमा बी कहा जाता है । इसकी प्रभुख रूऩ से सप े द, रार एवीं कारी तीन प्रजानतमाीं ऩाई जाती हैं। इसक े ऩक े हुए सूखे फीज उफारकय खामे जाते हैं। दार क े रूऩ भें इसका खूफ उऩमोग ककमा जाता है । इसक े आटे से बी अनेक खाध ऩदाथम फनामे जाते हैं। इसे अींक े बी खामा जाता है । आमुवेद क े अनुसाय याजभाश ऩिने भें बायी तथा रूखे होते ु रयत कयक हैं। स्वाद भें कसैरे-भीठे होते हैं। मह वामु दोष को फढ़ाते हैं तथा कप एवीं पऩ्त दोष को शाींत कयता है । मह ऐमसडडटी को शाींत कयता है । मशशु क े जन्भ क े उऩयाींत ननममभत रूऩ से सेवन कयने से प्रिय ु भात्रा भें दध ू उतयने रगता है । स्वाददष्ट होने क े कायण याजभाश बोजन क े प्रनत रूचि फढ़ाता है । - पवशेष - प्राम: सबी प्रकाय की दारें रूखी, कसैरी-भीठी, ठण्डी, वामु दोष को फढ़ावा दे ने वारी, कप एवीं पऩ्त नाश कयने वारी, ऩेशाफ क े प्रवाह भें अवयोध राने वारी तथा भर को योकने वारी होती हैं। भींग े अरावा ू औय भसय ू क सबी दारें अपाया ऩैदा कयती हैं। आमुवेद भें भूींग की दार को शयीय क े मरए असीभ दहतकायी तथा भाश को सफसे हाननप्रद भाना है । दारों का सेवन दही क े साथ पवरुि आहाय भाना जाता है . मदद कयना ही हो तो दही को दहींग जीये की फघाय रगा रे.आहाय पवशेषज्ञों क े अनुसाय शयीय भें मूरयक ऐमसड फढ़ने की क्स्थनत भें दारों का सेवन कयना

सवमथा ननपषि है ।